मादक द्रव्य और भारतीय युवा पीढ़ी (Youth and Drugs in India)

उड़ता 💨 भारत

💨आज हमारा समाज बहुत व्यस्त हो गया है | माँ और पिता के पास बच्चों को देने के लिए पर्याप्त समय नहीं हैं | इस वजह से बच्चों को सही मार्गदर्शन नहीं मिल पाता | वे कई बार गलत राह पकड़ लेते हैं | मादक पदार्थों का सेवन भी उनमें से एक है |
💨 ज्यादातर युवक मादक पदार्थों का सेवन शौक तथा फैशन के लिए शुरू करते हैं पर धीरे-धीरे उन्हें कब इसकी आदत लग जाती है, पता भी नहीं चलता | उन का शरीर और दिमाग उस मादक पदार्थ पर निर्भर हो जाता है |
नशे के लिए अब पान, बीड़ी, सिगरेट और शराब के अलावा कम खर्च में नशीली दवा सीरप और इंजेक्शन का उपयोग अधिक हो रहा है।
💨 नशे के लिए युवा स्पाजमो प्राक्सीवान, एंटी एलर्जिक टेबलेट एविल, नारफिन एंपुल, नाइट्रोसीन टेबलेट, आयोडेक्स व कोरेक्स सीरप का भी उपयोग कर रहे हैं। इनमें से नारफिन व नाइट्रोसीन को तो प्रतिबंधित कर दिया गया है। फिर भी ये मेडिकल स्टोर्स में मिल जाते हैं। रेलवे स्टेशन व ट्रेनों में भटकने और कबाड़ बीनने वाले बच्चों को बोनफिक्स सूंघने की लत लग गई है।
💨दुनिया भर में, संयुक्त राष्ट्र संघ का अनुमान है कि हेरोइन, कोकीन और कृत्रिम औषधियों के 50 लाख से अधिक नियमित उपयोगकर्ता हैं। वर्ल्ड ड्रग रिपोर्ट 2014 के मुताबिक लगभग पूरी दुनिया के 18 फीसदी आबादी के साथ, जो15 से 64 आयु वर्ग के बीच आते हैं, भारत दक्षिण पूर्व एशिया और दक्षिण – पश्चिम एशिया दोनों में नशीली दवा व्यापार का एक बड़ा बाज़ार बन गया है।
💨ड्रग्स और अपराध पर संयुक्त राष्ट्र कार्यालय और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा भारतीय राष्ट्रीय सर्वेक्षण की रिपोर्ट के मुताबिक करीब 10.7 मिलियन लोग, जितनी  स्विडन देश की जनसंख्या है, नशीली दवाओं का सेवन करते हैं। लगभग 8.7 मिलियन भांग खाने के आदि हैं जबकि 2 मिलियन लोग अफीमयुक्त दवाओं का सेवन करते हैं।  मिजोरम, पंजाब और मणिपुर राज्यों के लोग सबसे अधिक नशीली दवाओं का इस्तेमाल करते देखे गए हैं। इसका एक कारण इन राज्यों का अंतरराष्ट्रीय सीमओं और अंतरराष्ट्रीय दवा की तस्करी क्षेत्रों, जैसे कि ” स्वर्ण त्रिभुज ” ( म्यांमार , थाईलैंड और लाओस ) और ” गोल्डन क्रीसेंट ” ( ईरान , अफगानिस्तान और पाकिस्तान) के निकट होना हो सकता है।


💨मिजोरम में पिछले चार सालों में करीब 48,209 टन नशीली दवाइयां जब्त की गई हैं। पंजाब के ग्रामीण इलाकों में 67 फीसदी लोग नीशीली दवाइयों या मादक पदार्थों का सेवन करती है जबकि पंजाब के 70 फीसदी युवा आबादी नशा करने की आदि है। तथा पिछले चार सालों में पंजाब में करीब 39,064 टन नशीली दवाईयां बरामद की गई हैं। यह आकंड़े सरकार द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण के दौरान सामने आई है। मणिपुर में करीब 45,000-50,000 लोग नशे की चपेट में हैं। इनमें से आधे से अधिक लोग इंजेक्शन के ज़रिए नशे का सेवन करते हैं।
💨अध्ययन के दौरान पता चला है कि नशा करने वाले लोगों में से 12 फीसदी लोगों की उम्र 15 वर्ष से नीचे होती है जबकि 31 फीसदी लोग 16 से 25 वर्ष की आयु के बीच के होते हैं और 56 फीसदी 25 से 35 वर्ष के बीच के होते हैं।

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