वशुदेव कुटुम्बकम 2016

आजकल लोग देश के साथ विदेशो की खबरों पर भी ध्यान देते है पेरिस मे पर्यावरण को लेकर हुआ सम्मेलन मे पूरे विश्व को बचाने की कवायद दिखीl इसके साथ ही लोग दुनिया भर से आतंकवाद को भी ख़त्म करना चहते हैं UNICEF से लेकर G20 और SAARC जैसे संगठन भी एक वैश्विक  क्रांति लाना चहते हैं कुल मिलाकर आज हम ये समझ चुके हैं की साम्राज्यवाद के आगे वैश्विक समाजवाद का दौर है और देश की सीमाएँ ही सब कुछ नही हैंI विश्व एक होकर ही किसी लक्ष्य तक पहुँच सकता है वैसे भारत ये पहले से मनता रहा है वशुदेव कुटुम्बकम हो या  गुट निरपेक्षता भारत हमेशा आगे रहा हैI
 हमे अपने नजरिए को वैश्विक बनना है आज चाहे आप किसी त्योहार जैसे क्रिसमस, नया वर्ष प्रारम्भ, दिवाली या ईद  को ही ले लो हमारा वैश्विक बंधुत्व दिखता है हम सब पूरे विश्व मे इन्हे मानते हैंI आज समाजिक क्षेत्र हो या व्यवसायिक सभी की विचारो मे समानता का अनुभव साफ दिखता है इसका श्रेय लोकतंत्र व सभी लोकतांत्रिक देशों को जाता है आज के समय मे मीडिया और सोशल मीडिया का भी योगदान अद्भुत है यह नया साल भी इसे एक क़दम आगे ले जाएगा और हम किसी भी समुदाय या धर्म से नही बल्कि मानव श्रेणी मे अंकित किए जाएँगेI आप सभी के लिये नव वर्ष वैश्विक हो


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